आदिकाल

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे हिंदी साहित्य ब्लॉग पर इस पोस्ट में आपको net-jrf 2020  से संबंधित अति महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर दोनों साथ में मिलेंगे । 




आदिकाल
सर्वप्रथम किसने उत्तर भ्रंश को पुरानी हिंदी कहा ?-चंद्रधर शर्मागुलेरी
हिंदी के आरंभिक ग्रुप को अब हट किसने कहा ?-     डॉ भोला शंकर व्यास
इस प्रकार दसवीं से 14वीं शताब्दी काल, जिसे हिंदी का आदिकाल कहते हैं, भाषा की दृष्टि से अपभ्रंश का ही बढ़़ाव है - कथन किसका है ? - हजारी प्रसाद द्विवेदी
उत्तर अपभ्रंश की रचनाओं का अपने इतिहास में विवेचन करने वाले एवं उसे हिंदी साहित्य के अंतर्गत स्थान देने वाले विद्वान हैं - राहुल सांकृत्यायन डॉ रामकुमार वर्मा, डॉ. श्यामसुंदर दास हजारी प्रसाद द्विवेदी
उत्तर अपभ्रंश है-आरंभिक हिंदी
शिव सह सेंगर ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है- पुष्य या पुणे को ७ वीं शती
राहुल सांकृत्यायन ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है- सरहपाद को
डॉ गणपति चंद्र गुप्त ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है- साली भद्र सूर्य को
डॉ रामकुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य का आरंभ कब से स्वीकार किया है ?- 613 ईस से
डॉ रामकुमार वर्मा ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है ? - स्वयंभू को
 डॉ रामकुमार वर्मा ने अपभ्रंश का प्रथम कवि किसे माना है?- स्वयंभू को
सर्वमत से विद्वानों ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है सिद्ध सरहपा (सरहपाद) को
सरहपा का समय है -
राहुल सांकृत्यायन के अनुसार.......
डॉ विनय दोस्त भट्टाचार्य के अनुसार ६३३
हिंदी काव्य धारा में सरहपा की कुछ रचनाओं का संग्रह किसन किया ? राहुल सांकृत्यायन
किसी भारतीय भाषा में रचित इस्लाम धर्मावलंबी तब की प्रथम रचना है -अब्दुल रहमान कृत संदेश रासक १३ वीं शती 
हजारी प्रसाद द्विवेदी ने हिंदी का प्रथम कवि किसे माना है -अब्दुल रहमान को 
सामान्य रूप से हिंदी साहित्य का आरंभ माना जाता है सिद्धू की रचनाओं से
जनता रूप में हिंदी का प्रथम साहित्यिक रचना है -श्रावकाचार देव सेन कृत
शुक्ला जी ने पुरानी हिंदी को कहा है प्रकताभास हिंदी या अपभ्रंश
ग्रियर्सन ने आदिकाल की अंतिम सीमा मानी है ? - १४०० ई o तक
आचार्य शुक्ल ने आदिकाल की अंतिम सीमा मानी है ? - १६१८ ई o तक
डॉ राम शंकर शुक्ल रसाल ने आदिकाल की अंतिम सीमा मानी है ? - १३४३ ई. तक
सामान्यता आदिकाल की अवधि मानी जाती है ? - सातवीं शती के मध्य से चौदहवीं शती के मध्य तक।
हिंदी साहित्य के आदिकाल का समय महाराज भोज के समय से हम्मीर देव के समय तक किसने माना है ? - आचार्य शुक्ला
आचार्य शुक्ल ने हिंदी साहित्य का आविर्भाव किससे माना है ? - प्राकृत की अंतिम अपभ्रंश अवस्था से
उस समय जैसे गाथा कहने से प्राकृत का बोध होता था वैसे ही दोहा या दूहा कहने से अपभ्रंश या प्रचलित काव्य भाषा का पद्य समझा जाता था । - कथन किसका है ? - आचार्य शुक्ल
किस इतिहासकार ने अपने इतिहास में अपभ्रंश साहित्य को हिंदी साहित्य से अलग मानकर उसे पूर्व पीठिका के रूप में प्रस्तुत किया है? - आचार्य शुक्ल
आचार्य शुक्ल ने जिन १२ ग्रंथों के आधार पर आदिकाल का नामकरण वीरगाथा काल किया था, वे हैं-

(अपभ्रंश भाषा में)

  1. विजयपाल रासो 
  2. हम्मीर रासो
  3.  कीर्तिलता 
  4. कीर्तिपताका

(देश भाषा काव्य)

  1. खुमान रासो
  2.  बीसलदेव रासो
  3.  जयचद्र प्रकाश 
  4. जयमयंक जस चंद्रिका 
  5. पृथ्वीराज रासो  
  6. परमाल रासो
  7. खुसरो की पहेलियां
  8.  विद्यापति पदावली

अपभ्रंश भाषा में ४ ग्रंथ
देशी भाषा में ८ ग्रंथ   (कुल १२) 

आचार्य शुक्ल ने हिंदी साहित्य इतिहास लेखन में किन-किन ग्रंथों से सामग्री लिया है ?
-मिश्र बंधु विनोद, श्यामसुंदर दास कृत 'हिंदी कोविद रत्नमाला', रामनरेश त्रिपाठी कृत 'कविता कौमुदी', वियोगी हरि कृत ब्रज माधुरी सार, मिश्र बंधु विनोद- हिंदी को विद रत्नमाला, कविता कौमुदी, ब्रश माधुरी सार।

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